नरेंद्र मोदी - क्या सोचा क्या निकला

देश की जनता , कहना गलत होगा , देश की 32 प्रतिशत जनता ने मोदी जी की छवि अपने दिमाग में एक सुपर मेन की बैठाई थी ,

जिनके आते हीं #कालाधन देश में आ जाएगा , देश में #रोजगार का सृजन होगा #विकास की आंधी बहेगी #युवाओं का समुज्जवल भविष्य निर्माण शुरू होगा #शांति होगी #उग्रवादियों पर अंकुश लगेगा #पाकिस्तान को घर में घुस कर मारेंगे #दाऊद_इब्राहिम जैसों को खींचकर देश में लाया जाएगा #डॉलर के मुकाबले रुपैया तेज होगा महंगाई में गिरावट आएगी खाद्दान्न सस्ते होंगे #नक्सली समस्या पर गंभीर चिंतन होगा #जवानों के हितों की रक्षा होगी....

पर हुआ क्या ?

प्रधानमंत्री जी ने काला धन के नाम पर खानापूर्ति करते हुए नोटबंदी का क्रम लागू कर दिया , परिणाम पूरे देश की अर्थव्यवस्था अस्त व्यस्त हो गई थी,
लोग दिनचर्या के कामों को छोड़कर बैंकों की आगे कतार में लगे दिखे हाउस कतार में एक भी करोड़पति अरबपति नहीं थी खेतों खेती और किसान कम तनख्वाह वाले सरकारी अधिकारी छोटे व्यवसाय मजदूर जिनके पास अपने मेहनत की कमाई से जमा 5-10, 500 1000 के नोट्स थे जिन्हें बदलने के लिए वह अपने सारी ऊर्जा को लगा रहा था

रोजगार सृजन की दिशा में अब तक सरकार का सफर शून्य है हां मोदी जी की सरकार बनने के बाद गौ रक्षक का रोजगार सृजन हुआ है जो मानव भक्षक बंद कर अपनी निष्ठा दिखाते हैं

रुपैया के मुकाबले डॉलर रोज मजबूत होता जा रहा है

नक्सली समस्या और भयावह रूप लेती जा रही

पाकिस्तान के मन इतनी बढ़ गई कि अब हमारे सैनिकों की शहादत के बाद उनके लाशों के साथ अमानवीय कृत्य किया जा रहा है

चुनाव आयोग जम्मू कश्मीर के अनंतनाग लोकसभा में उपचुनाव करवाने की स्थिति में नहीं पूरा का पूरा जम्मू कश्मीर पत्थरबाजों के कब्जे में आए दिन देश के जांबाज सबूतों के साथ कश्मीर से अनहोनी घटनाएं सुनने में आती है

देश के अंदर विभिन्न धर्मों के बीच अविश्वास का माहौल बन गया

गरीबी भुखमरी विकास जैसे मुद्दे गायब हो गए अभी तीन तलाक गौ हत्या अजान जैसे मुद्दे राष्ट्रीय मुद्दे बन गए

अच्छे खासे रक्षा वजट बाले देश में जवान (तेजबहादुर) जली रोटी दिखाता है तो उसे नोकरी से बर्खास्त कर दिया जाता है

जवानों की शहादत के बाद रटे-रटाए जुमले घटना की कड़ी निंदा शहादत बेकार नहीं जाएगी और पड़ोसी देश को चेतावनी अंत में जवानों को श्रद्धांजलि एक खानापूर्ति की रसम बन गई है

छप्पन इंची के सीने वाले प्रधानमंत्री पूर्णत: मौन है उनके मन की बात का विषय सेना की शहादत नहीं नक्सल की समस्या नहीं जम्मू कश्मीर के पत्थरबाज नहीं बल्कि कोई राजनीतिक विषय होता है

पिछले प्रधानमंत्री तो बयान देकर खानापूर्ति करते थे अभी वाली #साहिब तो बयान भी देना जरुरी नहीं समझ रहे

जो मीडिया हर घटना के बाद पूर्व प्रधानमंत्री जी का इस्तीफा मांगतीे थी आज सरकार} के तलुवे चाट रही
समय के साथ बयान को बदलने वाले नेताओं की सूची में श्री नरेंद्र मोदी जी का नाम सर्वप्रथम आएगा

देश की जनता खुद को ठगी सी मासूस कर रही जिसे शेर समझा था वह तो मिट्टी के शेर निकला

मेरी माननीय प्रधानमंत्री Narendra Modi जी से करबद्ध प्रार्थना है कि पाकिस्तान को उसकी हद बताते हुए आर पार का जवाब दें

शायद आपके इस कदम से देश विकास भुखमरी गरीबी सबको भूल जाएगा 🙏

जय हिंद वंदे मातरम ✍

सुकमा नक्सली हमला

देश के अंदर हमारे वीर जवानों पर देश यही कुछ विध्वंसक तत्वों ने कायराना हमला किया और हमारे 24-26 जवान शहीद हो गए

हर बड़ी घटना के बाद औपचारिकता की शोकसभा श्रद्धांजलि और हुक्मरानों द्वारा रटे रटाए अल्फाज कड़ी निंदा घोर निंदा का दौर चल रहा देश के गृह मंत्री ने इस घटना की कड़ी निंदा की मानो उनकी कड़ी निंदा के बाद अमानवीय गुणों वाले नक्सली आत्मसमर्पण कर देंगे या फिर आने वाले दिनों में कभी हिंसा नहीं करेंगे , शहीद जवानों के परिजनों को उनके घर का खोया सदस्य मिल जाएगा

विचारणीय प्रश्न है क्या प्रधानमंत्री गृह मंत्री या अन्य के द्वारा इस घटना की निंदा भर्तसना से समस्या का हल हो जाएगा ?

शायद नहीं सरकार को कुछ ठोस पहल कुछ ठोस कदम उठाने की आवश्यकता है अपनी सूचना तंत्र को झकझोरने की आवश्यकता है प्रशासन की मुखबीर या तो है ही नहीं या फिर दहशत में बिके हुए से दिखते हैं

प्रशासन ने अपनी पैठ आज तक इन नक्सली संगठनों में कायम नहीं किया इक्के दुक्के विवादास्पद मुखबिरों की सूचना पर कार्यवाहियों को अंजाम दिया जाता है नक्सली ना केवल लाकर अपनी ताकत में लगातार इजाफा कर रहे हैं बल्कि बीच-बीच में पूरे देशवासियों के लिए ऐसी असहनीय पीड़ा दे जाते हैं और हमारी सरकार बड़ी-बड़ी बातें करते खोखले वादे और धमकियां देते अपने दायित्व की इति श्री मान लेते हैं

फर्ज कीजिए आज छत्तीसगढ़ में या फिर देश में भाजपा की सरकार नहीं होती तो क्या तब भी नरेंद्र मोदी जी राजनाथ सिंह जी या अन्य भाजपाई सिर्फ दुखी प्रकट करते जी नहीं भक्तों की फौज ट्रोल कर रही होती और एक से एक क्रांतिकारी पोस्ट आते

सवाल यह नहीं है कि हमने अब तक क्या खोया सवाल किया है कि हमारी तैयारी हमारी सोच आने वाले दिनों में ऐसे घटने ना हो इसके लिए कितनी है सरकारों को अपने दायित्व का निर्वहन करना चाहिए सीमा पार के उग्रवादियों से जिस अंदाज में हम निपटते हैं हमारी सरकारों को वही जवाब वही रुतवा नक्सलियों के लिए रखना चाहिए

क्योंकि

उग्रवादियों का कोई मजहब नहीं होता देश नहीं होता भावना नहीं होती मानवता नहीं होता , एक ही उपाय ठोको सालों को 👊

मोदी जी लफ्जों कि बाज़ीगरी से देश नहीं बदलते

शब्दों की बाज़ीगरी से चल रही भाजपा सरकार ?

देश के शीर्ष पर बैठे सत्ताधीष कि अति महत्वाकांक्षा उस दिन हीं दिख गयी थी जब उन्होंने गुजरात के अन्दर लालकिला का प्रारुप तैयार करवाकर तीरंगा लहराया ।

नेतृत्व को लेकर , राष्ट्रमंडल , कोयला दवा 2g घोटाला में प्रत्यक्ष परोछ भागेदारी आदि में शामिल होने का संदेह आक्रोश में परिणत हो गया था /

कारपोरेट लाबी के माल मीडिया के दलाल ने एक बनावटी आभामंडल तैयार किया और गुजरात के विवादित मुख्यमंत्री को इस कदर उछाला कि लहर सुनामी सी उठ गई /
लोगों को लगा मोदी जी पीएम बनेंगे तो दाऊद क्या और पाकिस्तान क्या चाईना हमारे दरवाजे पर नाक रगडेगा ...महंगाई यूं उडनछू हो जायगी जैसे अमरीका कि दादागिरी , रुपया डालर से दूना उग्रवादी तो छोडो अपराधी भी पैदा नहीं होगा , देश में एक भी  बेरोजगार नहीं रहेगा / अथाह काला पीला लाल धन स्वीस बैंक से हमारे देश में आयेगा तकरीबन 15 लाख का हिस्सा हर भारतीय को मिलेगा / किसानों को फसलों के वाजीब मुल्य मिलेंगे ,  बेरोजगारों को रोजगार मिलेगा युवाओं के लिए युवा आयोग का गठन होगा गरीबों को घर मिलेगा पर यह क्या मोदी जी ने सत्ता संभालते  ही हवाई जहाज और विदेश दौरे का ऐसा कार्यक्रम चलाया कि लोगों को लगा मानो हमने प्रधानमंत्री नहीं विदेश मंत्री  चुन लिया देश में मोदी का विरोध बढ़ने लगा . लोग नित्य प्रति हो रहे आतंकवादी घटनाओं से आहत होने लगे तभी माननीय प्रधानमंत्री ने क्रॉस बॉर्डर फायरिंग को सर्जिकल स्ट्राइक का नाम देकर क्रेडिट लेने की कोशिश की हलाकि पाकिस्तान ने अपने देश के अंदर किसी भी सर्जिकल स्ट्राइक से इंकार किया .

हो सकता है पाकिस्तान की सरकार झूठ बोल रही हो पर यह झूठ उसने तब नहीं बोला जब "बराक ओबामा की सरकार ने पाकिस्तान के कराची में सर्जिकल स्ट्राइक कर ओसामा बिन लादेन को मारा था" उस समय तो पाकिस्तान ने सहर्ष स्वीकार किया था यहां सर्जिकल स्ट्राइक हुई खैर अगर यह सर्जिकल स्ट्राइक थी भी तो इससे पहले देश की सेना ने चार और सर्जिकल स्ट्राइक किए थे हां तब की सरकार ने इसका प्रचार नहीं किया था , न हीं सेना की किसी अफसर ने प्रेस कॉन्फ्रेंस कर मीडिया को इसकी जानकारी दी थी
बहुत कुछ देश में पहली बार हो रहा इस कार्यक्रम को जब समय बीत गया लोगों के जेहन में फिर से काला धन का गुबार भरने लगा तो सरकार प्रायोजित एक और शानदार ड्रामा देश की जनता को दिखाया गया जब #साहिब को लगा कि हम एक्सपोज़ हो रहे तो अपने रणनीतिकारों के साथ मिलकर एक अच्छा ड्रामा प्रायोजित किया जिस का प्रचार इस ढंग से किया गया मानो इसकी सफलता से देश की सारी समस्याएं हल हो जाएंगी काला धन देश में वापस लौट आएगा और रातो रात नोटबंदी लागू कर दी
फिर क्या था पूरा देश बैंकों के आगे कतार में खड़ा होगे . लोगों को ना तो काला धन जेहन में था न हीं महंगाई बेरोजगारी भ्रष्टाचार आतंकवाद दिमाग और दिल में , था तो सिर्फ एक चीज अपने 500 और 1000 के नोटों को बदलने को हताश
मीडिया  के दलालों ने नोटबंदी के दौरान अपनी पूरी भूमिका को सिर्फ और सिर्फ नोटबंदी को राष्ट्र कल्याण का विषय बताने में समेटे रखा
महंगाई दिन प्रतिदिन बढ़ती जा रही 2000के नोट आने से मुद्रा का जो अवमूल्यन हुआ वह अब अपने रंग और तेवर को दिखा रहा सरकार ने नोटबंदी से हुए लाभ भी सार्वजनिक करना जरूरी नहीं समझा क्योंकि ऐसा कोई लाभ प्रत्यक्ष रुप से नजर नहीं आया जिसे प्रचारित किया जा सके

बीते पांच राज्यों के चुनाव में भाजपा ने कहीं भी नहीं तो सर्जिकल स्ट्राइक के नाम पर वोट मांगा अब तो देश की जनता भी इस बदलाव को महसूस करने लगी . पांच राज्यों के चुनाव परिणाम आए सिर्फ दो राज्य में भारतीय जनता पार्टी को अस्पष्ट जनादेश मिला बाकी के 3 राज्यों में कांग्रेस बहुमत में आई यह चुनाव परिणाम स्पष्ट संदेश है कि देश की जनता अपने प्रधानमंत्री से आश्वस्त नहीं हो पाई जो भरोसा उसने नरेंद्र मोदी पर किया था वह कहीं ना कहीं से टूटा उत्तर प्रदेश को छोड़कर कहीं भी भाजपा के लिए कुछ खास नजर नहीं आए , उत्तराखंड में कांग्रेस की मृतप्राय स्थिति भाजपा के लिए वरदान बनी और उत्तर प्रदेश में सत्ता मिली तो 1. राम मंदिर का निर्माण , 2. उत्तर प्रदेश के किसानों की कर्ज माफी , 3. जिस दिन सत्ता मिली उसी दिन रात 12:00 बजे के बाद प्रदेश में चल रहे बूचड़खाने बंद
करने की घोषणा ने भाजपा को सत्ता के शीर्ष पर पहुंचा दिया , क्योंकि उत्तर प्रदेश में बहुजन समाज पार्टी समाजवादी पार्टी कांग्रेस सहित सभी दलों ने सिर्फ और सिर्फ अल्पसंख्यक अर्थात मुस्लिम वोटों को फोकस कर रखा था बहुसंख्यक मतदाताओं को अपनी उपेक्षा स्पष्ट दिखी . समाजवादी पार्टी के घर का झगड़ा भी भाजपा के जीत के लिए वरदान बना हलाकि जब से उत्तर प्रदेश की सरकार बनी केंद्र की तरह वहां भी ड्रामेबाजी शुरु हो गई भाजपा RSS ने जिस लव जिहाद की बात की उसे भूल छेड़खानी को रोकने के लिए एंटी लव जेहाद स्क्वाड की जगह एंटी रोमियो स्क्वाड बनाया गया गोकशी को बंद करने की जगह बूचड़खानों को बंद करने की जगह , अवैध और वैध का खेल खेला जा रहा है , किसानों की कर्ज माफी पर देश के वित्त मंत्री ने अपने हाथ खड़े कर दिए

राम मंदिर की चर्चा निरर्थक है चुकी मामला सर्वोच्च न्यायालय में अभी विचाराधीन है आपसी सहमति के लिए सर्वोच्च न्यायलय ने आज की तारीख मुकर्रर की थी मुझे लगता है फिर यह मामला सुप्रीम कोर्ट के ही अधीन होगा नजदीकी समय में राम मंदिर तो बनता नहीं दिख रहा ऐसा तथ्य बताते हैं
उत्तर प्रदेश की सरकार ने निश्चित रूप से एक अच्छा निर्णय लिया सरकारी कार्यालयों में नशा मुक्ति का मेरा मानना है कि इसे 10% भ्रष्टाचार पर तो गिरावट आएगी माहौल कुछ अच्छा बनेगा पर योगी सरकार की प्राथमिकता होनी चाहिए किसानों की कर्ज माफी जिसके जाल में उत्तर प्रदेश के किसान ही नहीं वरन देश के किसान छटपटा रहे इसकी शुरुआत उत्तर प्रदेश से होती तो हो सकता था देश की सभी राज्यों की सरकारें इसे अपने राज्यों में लागू कर देती
खासकर देश के महाराष्ट्र के किसान कर्ज के जाल में इस कदर बीथें पड़े हैं कि उन्हें आत्महत्या के अलावा और कोई रास्ता नहीं दिख रहा , वहां के किसान भी टकटकी लगाए उत्तर प्रदेश को देख रहे होंगे क्योंकि महाराष्ट्र में भी भाजपा की ही सरकार है , पर उत्तर प्रदेश में मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ जी अपने वादे पर खरा उतरते हैं या नहीं यह बड़ी बात होगी

केन्द्र सरकार को चाहिए विकल्पहीन देश में अपनी विश्वसनीयता बनाए रखें हमारे देश के प्रधानमंत्री महोदय में देश की जनता ने एक ऊर्जावान राजनेता एक ईमानदार व्यक्तित्व एक सादगी पसंद मानव देखा था जनता को खुद की ठगने जैसा एहसास हुआ होगा जब उन्होंने सुना होगा इस गरीब देश के PM 800000 रूपय का सूट पहनते हैं
निश्चित रूप से प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी जी को पूरा विश्व गंभीरता से देख रहा है ऐसे में देश की आधारभूत समस्याएं जिसमें किसान जवान और युवा यह तीनों बिखरे पड़े हैं टूटे टूटे से , इनमें उर्जा जगाना इन्हें इन का वास्तविक हक देना रोजगार का सृजन,  आतंकवाद पर कड़ी कार्रवाई , देश के अंदर स्थिरता देश की #संस्कृति और #धर्मनिरपेक्षता को कायम रखना हिंदू मुस्लिम के बीच बढ़ रहे हो अविश्वास की खाई को भरना , महिलाओं का उत्थान , शिक्षा के क्षेत्र में क्रांति , इन चीजों पर प्रधानमंत्री महोदय को गंभीरता से चिंतन करना चाहिए ,

सस्ती लोकप्रियता के लिए अवैध बूचड़खाने सर्जिकल स्ट्राइक या फिर नोटबंदी जैसे बहाने देश की दशा और दिशा को नहीं बदल सकते इसके लिए निश्चित रूप से प्रधानमंत्री जी को गंभीरता से विचार करना चाहिए ....

    ये जो पब्लिक है सब देखती है  🙄🤔

भाजपा MLC ने अपने दल के विधायक पत्नी सह MLC से किया छेड़खानी

#बीजेपी #विधायक नीरज कुमार बबलू की #एमएलसी पत्नी ने कल बीजेपी के एक एमएलसी पर #छेड़खानी का आरोप लगाया था उसके बाद विधायक ने एमएलसी #लालबाबू की विधानपरिषद में ही जमकर धुनाई कर दी…विधायक की पत्नी ने विधानपरिषद् के सभापति अवधेश नारायण सिंह से लाल बाबू प्रसाद की लिखित शिकायत भी की है.

कल का दिन बिहार विधानमंडल में एक काले दिन के रूप में दर्ज हो गया. भाजपा के एक विधानपार्षद(MLC) और उपाध्यक्ष लाल बाबू प्रसाद गुप्ता ने बीजेपी के विधायक की पत्नी और उन्ही के घटक दल की महिला विधानपार्षद को सरेआम सारी मर्यादाओं को तार-तार करते हुए सदन के अंदर छेड़ दिया, गलत तरीके से छुआ और अभद्र टिप्पणी की. पर भाजपा के तथाकथित सबसे बड़े स्वयंभू, प्रधानमंत्री मोदी जी के स्वजातीय ‘भद्र’ और ‘माननीय’ सुशील मोदी पूरे मुद्दे पर ही पर्दा डाल रहे हैं.

माननीया महिला विधान पार्षद के पति भी भाजपा के ही विधायक है, जो उस समय बिहार विधानसभा में उपस्थित थे. पीड़ित माननीया ने जब आपबीती को अपने पति को बताया तो विधायक जी ने विधान परिषद में जाकर भाजपा के ‘माननीय’ विधान पार्षद की लात घूसे बरसा कर सरेआम कुटाई कर दी. जिस मारपीट को बिहार भर से आए माननीयों ने अपनी आँखों से देखा, उसे भाजपा के नेता बड़ी बेशर्मी से नकार रहे हैं.

एक महिला माननीया के साथ यह दुर्व्यवहार किसी सुनसान सड़क पर नहीं, बल्कि लोकतंत्र के मंदिर तुल्य विधानमंडल में हुआ. छेड़छाड़ करने वाला कोई आवारा गुंडा, या चोर उचक्का नहीं, बल्कि भाजपा का एक तथाकथित माननीय निकला. दंगाइयों की तरह मारपीट करने वाला भी कोई गुंडा मवाली नहीं, भाजपा का ही ‘माननीय’ था.

आज सुशील मोदी को इस कुकृत्य को ढाँपने में शर्म नहीं आ रही? अपनी ही माँ बहनों से हुआ दुराचार पर इतनी घिनौनी चुप्पी? खून खून ना रहा, लाल पानी हो गया है. नारी के सम्मान में, अब क्यों नहीं उतरते मैदान में? क्या अब खुले में घूमते इन व्यभिचारी दुराचारी भाजपाइयों के डर से काम काजी महिलाएँ घर में घूँघट तान कर बैठ जाएँ? क्या संघ की नारी विरोधी मानसिकता को इसी बेशर्मी से भाजपाई हर कार्यालय में लागू करेंगे? क्या अब विधानसभा में भी रोमियो स्क्वाड की तैनाती करनी पड़ेगी, क्योंकि भाजपाई महिलाभक्षी, यहाँ भी महिलाओं को नोचने को तैयार बैठे हैं. कार्यालयों में इसी सोच के लोग महिलाओं का यौन शोषण करते हैं. जो परवश होकर बहता है, वो खून नहीं है, पानी है. जो हाई कमान के निर्देश पर इस अपमान को पचा जाए, वह इंसान नहीं, कोई रेंगने वाला प्राणी ही हो सकता है. जो महिला का सम्मान ना करे, उपभोग की वस्तु समझे, वह संघी मानसिकता का ही हो सकता है. प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी जी भाजपा के इस उपाध्यक्ष व MLC को संरक्षण दे महिला उत्पीड़न को बढ़ावा दे रहे है. अन्यथा ऐसे सदस्य को तुरंत पार्टी से बर्खास्त करें.

बिहार को जंगलराज के तमगे से गाहे बगाहे नवाज़ने वाली मीडिया को साँप क्यों सूँघ गया है? क्या आज कलम की स्याही सूख गई है या पत्रकारिता की आत्मा ने मीडिया के शरीर को त्याग दिया है? इकतरफा रिपोर्टिंग को क्या बिहार का बहु संख्यक वर्ग पहचान नहीं पा रहा? बिलकुल पहचान रहा है. किसी ने आत्मा बेच खाया तो क्या देश का बहु संख्यक वर्ग अपना मस्तिष्क त्याग, आत्म सम्मान गँवा, मीडिया को नवाज़ते रहेगा?

फ़र्ज़ कीजिए कि छेड़ने वाला शख़्स गैर भाजपाई होता? फिर भाजपाई और उनके भोंपू कैसे छाती पीट रहे होते! बिहार ही नहीं, देश भर की मीडिया में चौबीसों घण्टे, यही मुद्दा छाया रहता. जंगलराज नाम का भेड़िया आया, चिंघाड़ चिंघाड़ कर मीडिया सबको बताती. अपने चुनावी भाषणों में मोदी जी यह मुद्दा उठाना ना भूलते. पीड़ित महिला का नाम देश के बच्चे बच्चे को याद हो जाता. पार्टी की तथाकथित इज़्ज़त बचाने के लिए, महिला की इज़्ज़त को कचरे दानी में फेंकने के बराबर समझा जा रहा है.

बेटी पढ़ाओ, बेटी बचाओ का जुमला गढ़ने वाले महिलाओं को किस स्तर का समझते हैं, यह सोलह आने स्पष्ट हो गया है. अगर एक महिला की इज़्ज़त के लिए सभी महिलाएँ सड़कों पर ना उतरीं, तो कल किस मुँह से यह देश महिला उत्थान की बात करेगा? मोदी जी का चेहरा उन्हीं के पार्टी के लोग चमका रहे है. इनका यह विधान पार्षद उक्त महिला पार्षद साथ पहले भी छेड़खानी कर चुका है लेकिन मोदी जी ऐसे कारनामे करने वालों हमेशा बचते है. मैं माँग करता हूँ की सबसे पहले देशभर के भाजपा के सांसदों और विधायको को महिलाओं सम्मान करने की ट्रेनिंग दी जाए और उन्हें ही सबसे पहले उन्ही की Romeo स्क्वॉड के हवाले किया जाए.

Media का योगीराग, प्रायोजित कार्यक्रम ?

मीडिया में #उत्तरप्रदेश के #मुख्यमंत्री #आदित्यनाथ योगी के #अखंडपाठ से अब लोग कुछ #ऊबने लगे हैं.

उन्हें लग रहा है कि मीडिया अति कर रहा है. यही नहीं, वे योगी के #महिमामंडन को संदेह के साथ भी देख रहे हैं.

एक बार फिर मीडिया शक़ के दायरे में है और उसकी मुख्य वजह है उसका #एकपक्षीय कवरेज.

ये सिलसिला #यूपी चुनाव में #बीजेपी की #जीत से शुरू हुआ था और अब ये योगी के मुख्यमंत्री के रूप में काम करने तक बदस्तूर जारी है.

क्या है मीडिया का #एजेंडा?
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ताज्ज़ुब की बात है कि मीडिया को योगी में अचानक इतने सारे गुण नज़र आने लगे हैं मानो वे इस धरती के प्राणी ही न हों. वे उन्हें मसीहा या तारणहार के रूप में पेश करने में जुटे हुए हैं.
इस भक्ति-भाव से पत्रकारिता तो नहीं हो सकती.
ऐसा लगता है कि मीडिया योगी आदित्यनाथ की छवि निर्माण में लगा हुआ है, शायद हिंदुत्व का नया नायक गढ़ रहा है.

मोदी की ही तर्ज़ पर वह योगी को कद्दावर नेता के रूप में गढ़ रहा है. अब ये देखना होगा कि ऐसा जाने-अनजाने में हो रहा है या किसी एजेंडा के तहत.

वैसे देखा जाए तो मीडिया का काम किसी की छवि को बनाने या बिगाड़ने का नहीं है. उसका काम तो जानकारियों को सही संदर्भों के साथ पेश करना होता है.

अगर इसमें कोई घालमेल करता है तो इसका मतलब है कि वह अपनी ज़िम्मेदारी सही ढंग से नहीं निभा रहा.

कहां ग़ायब हो गईं योगी से जुड़ी #नकारात्मक ख़बरें?
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ये देखकर हैरत होती है कि मुख्यमंत्री चुने जाने के बाद से योगी के बारे में ऐसी ख़बरें लगभग नदारद हो गई हैं जिनमें उनके व्यक्तित्व के नकारात्मक पहलू उजागर होते हैं.
इसके उलट उनकी उन चीज़ों को भी सकारात्मक बताए जाने का अभियान चल रहा है जिनकी जमकर ख़बर ली जानी चाहिए.
कथित ऑपरेशन रोमियो और बूचड़खानों के ख़िलाफ़ छेड़ा गया अभियान ऐसे फ़ैसले हैं जिन पर मीडिया को तथ्यों से लैस होकर सवाल खड़े करने चाहिए.

मगर अपवादों को छोड़ दें तो मीडिया का अधिकांश हिस्सा तालियाँ पीटने वाला बन गया है जबकि मीडिया का काम चियरलीडर्स का तो बिल्कुल भी नहीं है.

चमत्कारी पुरुष के तौर पर योगी का प्रचार
पिछले एक हफ़्ते में ही योगी ने बिना #कैबिनेट की बैठक किए 50 से ज़्यादा #घोषणाएं कर डाली हैं. लेकिन अफ़सोस की बात ये है कि मीडिया उन घोषणाओं की पोल-पट्टी खोलने के बजाय उन्हें महान शुरुआत के रूप में प्रचारित करने में जुटा हुआ है.

यही नहीं, वे योगी को #चमत्कारी #पुरुष के रूप में प्रचारित करने में भी जुटे हुए हैं.

बाघ के बच्चे को दूध पिलाते, #मगरमच्छ का गला सहलाते या भारी भरकम अजगर अपने कंधे पर लिए योगी की झूठ सी लगने वाली तस्वीरें दिखाने का और कोई मक़सद नहीं हो सकता. ये सब #फोटोशॉप का कमाल हैं.

मीडिया में #मोदी के भी थे #मनगढ़ंत क़िस्से
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ऐसा ही कुछ कमाल नरेंद्र मोदी के प्रधानमंत्री चुने जाने के समय भी दिखाया गया था.
नरेंद्र मोदी के बाल्यकाल के मनगढ़ंत किस्से मीडिया में खूब फैलाए गए थे. ये भी सच है कि इन तस्वीरों की पोल भी मीडिया ने ही खोली, मगर जिस पैमाने पर वे प्रचारित कर दी गईं, उस स्तर पर उनका खंडन नहीं हुआ.

ज़ाहिर है कि अधिकांश लोग सच्चाई से वाकिफ़ नहीं हो पाए हैं.

इस तरह का #पत्रकारीय विवेक एवं #प्रतिबद्धता कम ही मीडिया संस्थानों में नजर आ रही है.
सवाल उठता है कि आख़िर मीडिया इस तरह का एकपक्षीय कवरेज क्यों कर रहा है?
क्या ये सब आयोजित-प्रायोजित है या कोई दबाव उन्हें ऐसा करने के लिए मजबूर कर रहा है?

मीडिया और #सत्ता की #सहमति
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ये तो कई बार महसूस किया जा चुका है कि मीडिया पर सत्ता का दबाव है और वह जैसै एक अघोषित इमरजेंसी झेल रहा है.

इसके भी कई उदाहरण सामने आ चुके हैं कि मीडिया और सत्ता के बीच एक किस्म की सहमति बन चुकी है..

इसीलिए अब वह ऐसा कुछ भी नहीं करता जिससे सरकार और सत्तारूढ़ दल को किसी तरह की परेशानी हो.

इसे इस तरह भी देखा जा सकता है कि मीडिया भी हिंदुत्व लहर की चपेट में आ गया है, उसका भी भगवाकरण हो गया है.

इसलिए ये स्वाभाविक ही है कि वह हिंदुत्व से जुड़े संगठनों एवं नेताओं की छवियों को चमकाने का काम करे.

कहीं #TRP का दबाव तो नहीं
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ये तो स्वयंसिद्ध है कि मीडिया पर बाज़ार के दबाव काम कर रहे हैं.
ऐसा हो सकता है कि लोगों में फिलहाल योगी के बारे में जानने की जिज्ञासा हो और मीडिया संस्थान उसे पूरा करने की कोशिश कर रहे हों और ये कोशिश अतिरंजित हो गई हो.
टीआरपी, इंटरनेट पर हिट्स एवं पाठकों के फीडबैक से पता कर लिया जाता है कि फ़िलहाल लोग क्या चाहते हैं और फिर उसी तरह की सामग्री परोसी जाती है.

लेकिन लोकप्रियता एवं मुनाफ़े की भूख अगर पत्रकारीय मूल्यों से खिलवाड़ करवाती है, तो ये अनैतिक भी है और जन विरोधी भी.

इसका विरोध होना चाहिए और नियामक संगठनों का ध्यान इस ओर खींचा जाना चाहिए.

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         दीपा आनंद एवं अविनाश आनंद कोरोना संक्रमन के रोकथाम के लिए देशभर में वैक्सीनेशन का काम तेज कर दिया गया है / इसी क्रम में कल 10/04/20...